Spirit of a Fighter960 / 1295

Spirit of a Fighter – Chapter 960

7 min read November 5, 2026

उसकी आवाज़ में कुछ ऐसा था जो मेरे अंदर तक चला गया। मैंने कुछ नहीं कहा। मैं कह ही नहीं सकता था।

तभी टिंकू आगे आया। उसने चुपचाप अपनी जेब से एक लड्डू निकाला और हरनाम के हाथ में रख दिया। हरनाम ने उसे देखा, फिर टिंकू को।

"ये क्या—"

"गोलू के लिए," टिंकू ने कहा, बिना उसकी तरफ़ देखे। "जब वो बाहर आए, तो उसके हाथ में देना। बच्चे को पहली चीज़ मीठी याद रहनी चाहिए।"

हरनाम ने लड्डू को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया। उसकी आँखों से फिर पानी आया, पर इस बार उसने पोंछा नहीं।

मीरा ने गेट की घंटी बजाई। दो बार। लंबी, फिर छोटी।

अंदर से पैरों की आवाज़ आई। एक औरत आई — पचास के आस-पास, सफ़ेद साड़ी, चश्मा, हाथ में रजिस्टर। उसका चेहरा सख़्त था, पर आँखों में थकान।

"क्या है?" उसने गेट के उस पार से पूछा।

"मैडम," मीरा ने कहा, आवाज़ में वो नरमी जो वो कभी-कभी निकाल लेती है, "मैं गोलू के गाँव से आई हूँ। उसकी माँ बीमार है। बहुत बुरी हालत में है। डॉक्टर कह रहे हैं कि बस कुछ दिन।"

वार्डन ने रजिस्टर खोला और उसमें देखा।

"गोलू?" वो बोली। "गोलू कौन?"

"जो कल से यहाँ है," मीरा ने कहा। "आपके रजिस्टर में होना चाहिए। हरनाम का बेटा।"

वार्डन के चेहरे पर कुछ बदला।

"वो तो कल से यहाँ नहीं है," उसने कहा, और उसकी आवाज़ में वो झुंझलाहट थी जो रोज़ पूछे जाने वाले सवालों से आती है। "उसके चाचा उसे ले गए थे।"

मीरा एक कदम पीछे हटी। मैंने उसका चेहरा देखा। उसके होंठ हिले, पर आवाज़ नहीं निकली। फिर उसने पूछा, धीरे से, जैसे साँप को छूते हुए:

"कौन से चाचा?"

वार्डन ने कंधे उचकाए।

"वही जो हर महीने आते हैं," उसने कहा। "बड़ी मूँछों वाले। तेल लगी हुई। अँगूठी में पत्थर वाली। वो दो महीने से आ रहे हैं, बच्चों को मिठाई बाँटते हैं। बहुत अच्छे आदमी हैं।"

और मीरा के हाथ से बैग छूट गया।

बैग ज़मीन पर गिरा और खुल गया। काग़ज़ बाहर बिखर गए, धूल में। मीरा उन्हें उठाने के लिए नहीं झुकी।

मैंने उसकी तरफ़ देखा। उसका चेहरा सफ़ेद था — नहीं, सफ़ेद नहीं, पीला, जैसे किसी ने उसका खून निकाल लिया हो।

"दो महीने," वो फुसफुसाई। "वो दो महीने से आ रहा है। वीर, हमें पता ही नहीं चला।"

मेरी छाती में कुछ हिला।

"तो गोलू कहाँ है?" हरनाम ने गेट से चिल्लाकर कहा। उसकी आवाज़ फट गई थी। "मेरा बेटा कहाँ है?"

वार्डन ने एक कदम पीछे लिया।

"वो उनके साथ गया," उसने कहा, और उसकी आवाज़ में पहली बार डर आया। "उसने मुझे मिठाई देकर कहा था कि बच्चे की माँ की तबीयत खराब है, उसे घर ले जा रहे हैं। उसके हाथ में काग़ज़ था, मेरे पास भी है—"

वो अंदर गई और एक पल बाद लौटी। उसके हाथ में एक काग़ज़ था, जिस पर स्कूल की मोहर लगी थी।

मीरा ने काग़ज़ लिया। उसने एक नज़र देखा और उसका चेहरा और बिगड़ गया।

"ये फ़ॉर्म भरा हुआ है," उसने कहा, "पर हस्ताक्षर गोलू के पिता के नहीं हैं। ये हस्ताक्षर…" उसने मेरी तरफ़ देखा। "ये हस्ताक्षर कालू काका के हैं।"

मेरा सिर घूम गया।

"कालू काका?" मैंने कहा। "वो यहाँ क्यों आएंगे?"

"क्योंकि भैरव जानता है," मीरा ने कहा, और उसकी आवाज़ में वो ठंडक आई जो सिर्फ़ सच बोलते वक़्त आती है, "कि कालू काका ही वो एकमात्र आदमी हैं जिनके हस्ताक्षर के बिना गोलू स्कूल से निकल नहीं सकता। तो उसने कालू काका से ये फ़ॉर्म भरवा लिया।"

मैंने काग़ज़ को ध्यान से देखा। नीचे, कोने में, एक छोटा सा निशान था — तेल की उँगली का। मैंने उसे सूँघा।

बादाम का तेल।

"गोलू कहाँ है?" हरनाम फिर चिल्लाया। उसने सलाखें पकड़कर झकझोर दीं। लोहे का गेट बजा। "बता, कहाँ है मेरा बेटा?"

वार्डन डर गई। वो पीछे हटी।

"मुझे नहीं पता," वो बोली। "मैं सिर्फ़ रजिस्टर रखती हूँ। वो मुझे मिठाई देकर जाते हैं, और…" वो रुकी।

"और?" मैंने कहा।

"और उनके साथ एक बूढ़ी औरत भी आती है," उसने कहा। "सफ़ेद बाल, हल्दी का टीका। वो बच्चों को बहुत प्यार करती है। वो कहती है कि वो स्कूल की ट्रस्टी है।"

मैं जम गया।

"गंगा देवी," मीरा ने मेरी तरफ़ देखते हुए कहा।

मैंने गेट की सलाखें पकड़ीं। मेरी मुट्ठियाँ सफ़ेद हो गईं।

"वो औरत तुम्हारे पीछे खड़ी थी," मैंने धीरे से कहा, "जब उसने गोलू को बाहर निकाला।"

वार्डन ने सिर हिलाया।

"वो हँस रही थी," उसने कहा। "बच्चों को मिठाई बाँट रही थी। और वो गोलू को अपने हाथ से चॉकलेट दे रही थी।"

हरनाम ने अपना सिर लोहे के गेट पर दे मारा। एक बार। दो बार। तीसरी बार मैंने उसे रोका।

उसका माथा फट गया था, और खून की एक पतली लकीर उसकी आँख तक आ रही थी। वो मेरी बाँहों में टूटकर रोने लगा।

"उसने मेरे बेटे को छुआ," वो बोला। "उस बूढ़ी ने मेरे बेटे को अपने हाथ से खाना दिया।"

मैंने उसे अपनी छाती से लगा लिया। और उस वक़्त मेरे अंदर कुछ ऐसा जगा जो मैंने पहले नहीं महसूस किया था। गुस्सा नहीं। उससे भी बड़ा।

तभी टिंकू ने मेरी कमीज़ खींची।

"भैया," वो फुसफुसाया, "देख।"

उसने मैदान की तरफ़ इशारा किया।

मैंने देखा। उस दीवार के साये में, जहाँ अभी गोलू बैठा था, वहाँ अब कोई नहीं था। और मैदान के दूसरे कोने में, दीवार के एक छोटे से दरवाज़े के पास, एक साया खड़ा था — लंबा, चौड़ा, और उसके हाथ में कुछ चमक रहा था।

मैंने आँखें सिकोड़ीं।

वो एक पीली शीशी थी।

और वो साया, धीरे-धीरे, अपना हाथ उठाकर, हमारी तरफ़ इशारा कर रहा था। सीधे मुझे।

हवा में, उसी पल, बादाम के तेल की गंध आई। तेज़, ताज़ी, जैसे किसी ने अभी-अभी बोतल खोली हो।

"वो वहाँ है," मैंने कहा, और मेरी आवाज़ अपनी नहीं लगी। "भैरव वहाँ है। स्कूल के अंदर।"

मीरा ने मेरी तरफ़ देखा। उसके हाथ में वो काग़ज़ था, और उसका हाथ अब नहीं काँप रहा था।

"तो अंदर जाना होगा," उसने कहा।

"गेट बंद है," टिंकू ने कहा।

"गेट सिर्फ़ एक रास्ता है," मैंने कहा, और मैंने दीवार की तरफ़ देखा।

दीवार के उस पार, जहाँ टूटे काँच जड़े थे, वहाँ नीचे, ज़मीन के पास, एक जगह काँच टूटा हुआ था। जैसे किसी ने रगड़कर तोड़ा हो। और उस टूटी जगह में, फँसा हुआ, एक धागा था — गुलाबी रंग का, फूल वाला।

वही धागा जो गुड़िया की चप्पल पर था।

मेरी साँस रुकी।

"टिंकू," मैंने कहा, और मेरी आवाज़ बैठ गई, "वो धागा गुड़िया के पैर का है।"

टिंकू ने देखा। उसका चेहरा बदला।

"मतलब गुड़िया यहाँ आई थी?" उसने कहा। "पर वो तो कोठे में थी—"

"गुड़िया कोठे में थी," मैंने कहा। "पर ये धागा यहाँ है। और ये ताज़ा है। देख, इसमें धूल नहीं जमी।"

मैंने दीवार की तरफ़ कदम बढ़ाया। और फिर रुका, क्योंकि उसी पल मेरी जेब में कुछ हिला। चाँदी का टुकड़ा, मीरा वाला, ठंडा।

मैंने उसे जेब से निकाला। वो मेरी हथेली पर चमक रहा था, और उस पर एक बूँद गिरी थी — पीली, गाढ़ी, और उसमें से बादाम के तेल की गंध आ रही थी।

मैंने ऊपर देखा।

दीवार पर, बहुत ऊपर, एक खिड़की थी। और उस खिड़की में, अंधेरे के पीछे, एक चेहरा था। मूँछें, तेल, और आँखें जो मुझे देख रही थीं।

भैरव ने अपना हाथ उठाया और अपनी उँगली अपने गले पर फेरी। धीरे से। जैसे कोई बच्चे को सुलाने के लिए गाना गुनगुनाता हो।

और फिर खिड़की खाली हो गई।

हरनाम ने मेरी बाँह पकड़ी। उसका माथा अब भी खून से भरा था, पर उसकी आँखों में अब सिर्फ़ एक चीज़ थी — गोलू।

"वीर," वो बोला, "मेरा बेटा अंदर है। और मैं यहाँ खड़ा हूँ।"

मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा।

"तू यहाँ नहीं खड़ा है," मैंने कहा। "तू मेरे साथ अंदर जा रहा है।"

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