Spirit of a Fighter – Chapter 1005
मैं उनके पास पहुँचा और उनके सामने खड़ा हो गया।
"बेटा," उन्होंने कहा, और उनकी आवाज़ धीमी थी, "तू आ गया।"
मैंने जेब से वो काग़ज़ निकाला और उनकी गोद में रख दिया।
रणवीर सिंह ने काग़ज़ को उठाया। वो काँप रहे थे — उनके हाथ, उनकी उँगलियाँ। उन्होंने उसे पलटा, दूसरी तरफ़ किया, फिर हस्ताक्षर पर उँगली रखी।
"ये… ये मेरा हस्ताक्षर है," उन्होंने धीरे से कहा।
"नहीं है," मैंने कहा। "मीरा ने बताया — इसमें घुमाव कम है। ये जाली है।"
रणवीर सिंह ने सिर उठाया। उनकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं, और उनमें कुछ ऐसा था जो मैंने पहले नहीं देखा — डर।
"वीर," उन्होंने कहा, और उनकी आवाज़ फट गई, "मैंने ये काग़ज़ कभी नहीं लिखा। पर… पर मुझे याद है कि बीस साल पहले भैरव ने मुझसे कुछ काग़ज़ों पर हस्ताक्षर करवाए थे। उसने कहा था कि ये अखाड़े के नए नियम हैं। मैंने बिना पढ़े हस्ताक्षर कर दिए।"
उनकी आवाज़ टूट गई। उन्होंने अपना चेहरा हाथों में छुपा लिया।
"मैंने अपने ही हाथों से अपना अखाड़ा बेच दिया," उन्होंने कहा, और उनका शरीर काँपने लगा। "बिना जाने। बिना पढ़े। और उस आदमी ने मेरे पैर भी ले लिए, और मैं कुछ नहीं बोल सका।"
मेरा दिल भर आया। मैंने उनके आगे घुटने टेके और उनके हाथ अपने हाथों में ले लिए। उनकी हथेलियाँ ठंडी थीं, और उनकी उँगलियाँ काँप रही थीं।
"आपने कुछ नहीं बेचा," मैंने कहा। "उसने चुराया है। और चोरी की चीज़ वापस लौटाई जाती है।"
रणवीर सिंह ने मेरी तरफ़ देखा। उनकी आँखों से पानी बह रहा था, और वो उसे पोंछते भी नहीं थे।
"वीर," उन्होंने कहा, "तेरे पिता भवानी मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे। और मैं उनकी मौत का बदला नहीं ले सका। मैं डर गया था। मैं अपनी बेटी से डरता था कि कहीं उसके साथ कुछ न हो जाए।"
"अब डरने की ज़रूरत नहीं है," मैंने कहा। "अब हम सब साथ हैं।"
तभी टिंकू दौड़ता हुआ आया। उसके हाथ में एक काग़ज़ था, और वो हाँफ रहा था।
"वीर भाई," उसने कहा, "कालू काका ने मुझे ये दिया। ये उन्हें भैरव की पुरानी अलमारी से मिला था। इसमें भैरव के हाथ की लिखाई है।"
मैंने काग़ज़ लिया। उस पर कुछ लिखा था — हिसाब-किताब, कुछ नाम, कुछ आँकड़े। और नीचे एक हस्ताक्षर था।
मैंने उसे उस जाली काग़ज़ के हस्ताक्षर से मिलाया।
वो एक जैसे थे।
"टिंकू," मैंने कहा, "ये हस्ताक्षर भैरव के हाथ के हैं। उसने खुद रणवीर सिंह के हस्ताक्षर की नक़ल की है।"
टिंकू का मुँह खुला रह गया। "तो इसका मतलब है कि भैरव ने खुद ये काग़ज़ बनाया।"
"हाँ," मैंने कहा। "और अब हमारे पास सबूत है।"
कालू काका ने पीछे से कहा, "मैंने बीस साल पहले भैरव को रणवीर के काग़ज़ों पर काम करते देखा था। वो अक्सर देर रात तक उनके कमरे में बैठता था। मैंने सोचा था कि हिसाब देख रहा है। पर वो हस्ताक्षर बनाना सीख रहा था।"
रणवीर सिंह ने अपना चेहरा हाथों से हटाया। उनकी आँखें लाल थीं, पर उनमें अब वो डर नहीं था जो अभी था।
"वीर," उन्होंने कहा, "मुझे अदालत चलना है। मुझे खुद जज के सामने खड़ा होकर कहना है कि ये काग़ज़ मैंने नहीं लिखा।"
"आप नहीं जाएँगे," मैंने कहा। "मैं जाऊँगा। और मैं ये काग़ज़ जज के सामने रखूँगा और कहूँगा कि ये जाली है।"
रणवीर सिंह ने मेरा हाथ पकड़ा। उनकी पकड़ मज़बूत थी, जैसे वो किसी चीज़ को बचा रहे हों।
"तू मेरा बेटा है," उन्होंने कहा। "भवानी का बेटा। और आज से मेरा भी।"
मेरे आँसू रुक नहीं रहे थे। मैंने उनका हाथ कसकर पकड़ लिया।
तभी अखाड़े के फाटक की तरफ़ से शोर उठा। किसी की चप्पलें भागती हुईं, किसी की साँस फूलती हुई।
सुक्खी बुआ अखाड़े में घुसीं। उनकी साड़ी का पल्ला कंधे से खिसक गया था और उनके हाथ में पान का बीड़ा नहीं था — वो भूल गई थीं।
"अरे!" वो चिल्लाईं। "अरे सुनो सब! बड़ी खबर है!"
मैं उठ खड़ा हुआ। "क्या हुआ, बुआ?"
सुक्खी बुआ ने अपनी साँस रोकी, फिर एक ही साँस में बोलीं, "अरे मैंने तो सुना है कि ठाकुर ने अदालत में याचिका डाल दी है! और वो जज… अरे वो जज ठाकुर का बचपन का दोस्त है! बचपन का! दोनों ने एक ही स्कूल में पढ़ाई की थी!"
मेरे हाथ से काग़ज़ छूट गया। वो लाल मिट्टी पर गिरा और उस पर धूल उड़ी।
रणवीर सिंह की व्हीलचेयर की पहिये चरमराईं। उन्होंने धीरे से कहा, "तो अदालत में भी वही खेल।"
मैंने नीचे झुककर काग़ज़ उठाया। मेरी उँगलियाँ धूल से भरी थीं, पर मैंने उसे साफ़ किया और अपनी जेब में रखा।
"तो हमें नया रास्ता चाहिए," मैंने कहा। "ऐसा रास्ता जहाँ जज भी न हो और ठाकुर का दोस्त भी न हो।"
कालू काका ने पीछे से धीरे से कहा, "ऐसा एक रास्ता है। पर वो अदालत नहीं है, बेटा। वो पंचायत है। और उस पंचायत में बैठने वाले सब लोग ठाकुर से डरते हैं।"
मैंने उनकी तरफ़ देखा। "तो हम उनका डर निकालेंगे," मैंने कहा। "एक-एक करके।"
सुक्खी बुआ ने अपनी साड़ी ठीक की और फिर वो पान का बीड़ा ढूँढने लगीं जो उन्होंने कहीं गिरा दिया था। "अरे वो तो ठीक है," वो बोलीं, "पर सुनो, एक और बात सुनी है मैंने। ठाकुर ने कल रात किसी को भैरव की कोठी पर भेजा था। और वो कोठी में आग लगाने वाला था।"
मेरा खून जम गया। "कौन?"
सुक्खी बुआ ने अपना हाथ हवा में लहराया। "अरे वो ही, जो लंगड़ा है। शेराज़।"
टिंकू ने मेरी तरफ़ देखा। उसका चेहरा सफ़ेद था।
"वीर भाई," उसने कहा, "अगर शेराज़ कोठी जला रहा है, तो वो सबूत भी जला देगा। वो काग़ज़, वो बोतलें, सब कुछ।"
मैंने अपनी मुट्ठी कसी। मेरे हाथ में वो काग़ज़ था जो अभी-अभी मिला था, और मेरे दिल में वो आग थी जो बीस साल से सुलग रही थी।
"तो फिर देर किस बात की," मैंने कहा। "हम अभी चलते हैं।"
रणवीर सिंह ने मेरा हाथ पकड़ा। "वीर," उन्होंने कहा, "अकेले मत जाना।"
"मैं अकेला नहीं जाऊँगा," मैंने कहा। और मैंने टिंकू की तरफ़ देखा, फिर कालू काका की तरफ़। "हम सब चलेंगे।"
कालू काका ने अपना लोटा उठाया और उसे एक तरफ़ रख दिया।
"बीस साल मैं चुप रहा," उन्होंने कहा। "अब नहीं रहूँगा।"
हम अखाड़े के फाटक से बाहर निकले। सूरज ढल रहा था और आसमान में धूल की एक पतली परत फैल रही थी। दूर नहर की तरफ़ से ठंडी हवा आ रही थी, और उसमें जली मिट्टी की गंध थी।
मैंने अपनी जेब में हाथ डाला और वो काग़ज़ महसूस किया। वो अब भी वहीं था।
पर मुझे पता था कि ये काग़ज़ सिर्फ़ एक काग़ज़ नहीं है। ये बीस साल का धोखा है, और उसे जलाने से पहले मुझे उसे सबके सामने खोलना है — ठाकुर के सामने, पंचायत के सामने, और उस जज के सामने भी जो ठाकुर का दोस्त है।
हम चले, और हमारे पीछे अखाड़े की मिट्टी में हमारे पैरों के निशान रह गए — गहरे, साफ़, और किसी के मिटाए न मिटने वाले।
रास्ते में टिंकू ने धीरे से कहा, "वीर भाई, अगर शेराज़ ने कोठी जला दी, तो?"
मैंने उसकी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में डर था, पर उसके हाथ में मिठाई की डिब्बी थी — वो उसे पकड़े हुए था, जैसे वो उसका हथियार हो।
"तो हम वो सब याद रखेंगे जो हमने देखा," मैंने कहा। "आग सिर्फ़ काग़ज़ जला सकती है, याददाश्त नहीं।"
टिंकू ने सिर हिलाया। फिर उसने धीरे से कहा, "और अगर ठाकुर ने जज को खरीद लिया है, तो?"
मैंने आसमान की तरफ़ देखा। सूरज डूब रहा था और उसकी आख़िरी किरणें अखाड़े की दीवार पर पड़ रही थीं।
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