Spirit of a Fighter1001 / 1295

Spirit of a Fighter – Chapter 1001

7 min read November 5, 2026

"हाँ," मैंने कहा। "बाकी सवाल बाद में। पहले गोलू।"

हम स्कूल की तरफ़ बढ़े। पुरानी इमारत दूर से दिख रही थी — उसकी छत टूटी थी और खिड़कियों में काग़ज़ लगे थे।

मीरा ने मेरा हाथ थामा और धीरे से बोली, "तो स्कूल अभी भी ठाकुर के कब्ज़े में है, और वो वहाँ के बच्चों को भी अपने काम में लगाता है।"

मैंने उसकी तरफ़ देखा। "कैसे पता?"

"क्योंकि स्कूल के फाटक पर वो लड़का खड़ा है जो हमें कल मिला था," उसने कहा। "और उसके हाथ में पीली शीशी है।"

॥

उस लड़के के हाथ में पीली शीशी थी, और वो शीशी पकड़े हुए स्कूल के फाटक से सटा खड़ा था — न घुसता, न भागता।

मैंने कदम तेज़ किए। ठाकुर मेरे आगे-आगे चल रहा था और उसकी लाठी की ठक-ठक सड़क पर गूँज रही थी। पीछे मीरा का हाथ मेरी कलाई पर था और टिंकू अपनी मिठाई की डिब्बी सीने से लगाए हाँफ रहा था। हरनाम मेरी बगल में चल रहा था, और उसकी आँखें सिर्फ़ उस लड़के पर टिकी थीं।

वो लड़का था — बारह-तेरह साल का, फटी कमीज़, नंगे पैर, धूल में लिपटा। जैसे ही हम पास पहुँचे, उसने शीशी पीछे छुपा ली और दीवार से चिपक गया।

तभी हरनाम की साँस रुक गई।

"ये… ये तो…" उसकी आवाज़ फट गई। "ये मेरा बेटा है।"

और वो लड़का, जो अभी तक डर के मारे पत्थर बना खड़ा था, एक झटके में हमारी तरफ़ भागा।

"बाबा!"

हरनाम ने अपने दोनों हाथ फैला दिए। वो लड़का उसकी छाती से जा लगा और तीन साल के बच्चे की तरह रोने लगा। हरनाम का बस्ता ज़मीन पर गिरा, चश्मा तिरछा हो गया, और वो अपने बेटे का सिर अपने सीने में दबाकर खड़ा रहा। उसकी पीठ काँप रही थी।

"मैंने सोचा… मैंने सोचा तू मर गया," हरनाम ने फुसफुसाया। "उसने कहा था, गोलू, अगर तेरे बाप ने मुँह खोला, तो…"

"बाबा, मैं ठीक हूँ," लड़का रोते-रोते बोला। "पर वो मुझे खाना नहीं देते थे। और कहते थे — तेरा बाप आएगा तो उसे भी कूएँ में डाल देंगे।"

हरनाम ने अपने बेटे का चेहरा दोनों हाथों में लिया। उसके हाथ काँप रहे थे। "कूएँ में?" उसकी आवाज़ धीमी हो गई। "कौन… कौन कूएँ में?"

लड़का अभी भी रो रहा था। उसने पीली शीशी हरनाम की हथेली में रख दी। "ये मुझे एक बूढ़ी औरत ने दी। उसने कहा — इसका ढक्कन खोलना मत। और भवानी के बेटे से कहना कि जाली काग़ज़ अदालत में जाएगा।"

मेरे कान खड़े हो गए। मैं एक कदम आगे बढ़ा।

"कौन-सी बूढ़ी औरत?" मैंने पूछा। "उसने क्या पहना था? उसके बाल कैसे थे?"

लड़का मेरी तरफ़ देखकर रुका। फिर उसके चेहरे पर कुछ आया — थोड़ी पहचान।

"तुम हो वो?" उसने धीरे से कहा। "जिसे भैया बोला जाता है?"

मैंने सिर हिलाया।

और फिर वो लड़का हरनाम के हाथ से निकलकर मेरी तरफ़ आया। उसने मेरी कमर में अपनी बाँहें डाल दीं और अपना चेहरा मेरे पेट में दबा लिया। उसका शरीर छोटा था, हड्डियाँ उभरी हुई, और उसकी पीठ पर कमीज़ का कपड़ा पसीने से चिपका था।

"मुझे लगा तुम नहीं आओगे," उसने मेरे पेट में बोला, आवाज़ दबी हुई। "वो बोलते थे — तेरा वीर भैया तो खुद मरने से डरता है। बोलते थे, उसके पास तो सिर्फ़ एक जोड़ी फटी चप्पल है।"

मेरा गला भर आया। मैंने अपना हाथ उसके सिर पर रखा। उसके बालों में धूल और मिट्टी थी, और उनसे पुराने तेल की बदबू आ रही थी।

"मैं आ गया," मैंने कहा। मेरी आवाज़ खुरदरी निकली। "थोड़ी देर से आया। पर आया।"

टिंकू पीछे से आया और उसने अपनी डिब्बी खोली। "बेटा, पहले ये खा। फिर बातें करते हैं।"

लड़के ने लड्डू देखा और उसकी आँखों में पानी आ गया। उसने एक लड्डू चुपचाप मुँह में डाला और चबाने लगा। उसकी जबड़े की हड्डी तेज़ी से हिल रही थी, जैसे कई दिन का भूखा हो।

मीरा ने मेरा कंधा छुआ। "वीर, स्कूल के फाटक पर ताला है। और देख — दीवार पर किसी ने ताज़ा मिट्टी पोती है।"

मैंने पलटकर देखा। हाँ, इमारत के फाटक पर लोहे का बड़ा ताला लटक रहा था, और दीवार के कोनों पर ताज़ी लाल मिट्टी के हाथ के निशान थे — जैसे किसी ने रात में जल्दी से कुछ छुपाया हो।

तभी फाटक के अंदर से आवाज़ आई।

"कौन है? इतनी सुबह?"

एक औरत की आवाज़ थी — सख़्त, पर थकी हुई।

हरनाम ने फौरन अपना चश्मा ठीक किया और गोलू को अपनी पीठ के पीछे किया।

"कमला देवी," उसने धीरे से मुझे बताया। "वार्डन। इस स्कूल को भैरव के पैसे से चलाती है।"

फाटक के अंदर एक चेहरा आया — गोल-मटोल, सफ़ेद बालों की चोटी, गले में चाबियों का गुच्छा। उसने हमें देखा और उसकी भौंहें चढ़ गईं।

"क्या चाहिए? स्कूल में अभी छुट्टी है। कोई बच्चा नहीं आया।"

मैंने आगे बढ़कर कहा, "मैडम, हमें अंदर आना है। हमने सुना है यहाँ कुछ काग़ज़ रखे हैं।"

"काग़ज़?" उसने हँसी में उड़ा दिया। "कौन-से काग़ज़? ये स्कूल है, अदालत नहीं।"

तभी टिंकू आगे आया। उसने अपनी डिब्बी उठाई और अपनी सबसे मीठी आवाज़ में बोला, "मैडम जी, मैं रसोइया हूँ। बड़े अखाड़े से भेजा गया हूँ। कहा गया है — इस स्कूल के बच्चों को मिठाई खिलाओ। अपनी बनाई।"

वार्डन ने डिब्बी में झाँका। उसकी आँखें थोड़ी नरम पड़ीं।

"तुम रसोइया हो?" उसने पूछा। "अखाड़े से?"

"जी, मैडम," टिंकू ने कहा, और एक लड्डू उसकी तरफ़ बढ़ा दिया। "पहले चख लीजिए। अगर पसंद आए तो मुझे अंदर बुला लीजिए। मैं रसोई भी देख लूँगा।"

वार्डन ने लड्डू लिया, चबाया, और उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

"ठीक है," उसने कहा। "तुम अंदर आ जाओ। पर बाकी लोग बाहर रहेंगे।"

मैंने टिंकू की तरफ़ देखा। उसने मुझे आँख से इशारा किया — "भरोसा रख।" फिर वो वार्डन के पीछे-पीछे अंदर चला गया और फाटक बंद हो गया।

मैंने हरनाम से धीरे से कहा, "तू गोलू को लेकर पीछे हट। अगर मामला बिगड़ा तो तुझे भागना है।"

हरनाम ने सिर हिलाया। उसने अपने बेटे का हाथ पकड़ा और दीवार की छाया में खिसक गया।

मीरा ने मेरे कान में कहा, "वो शीशी देख।"

मैंने लड़के के हाथ से शीशी ली। पीली काँच, ढक्कन पर तराजू का निशान — वही निशान जो पहले वाली शीशी पर था। पर इसका ढक्कन पूरा साफ़ था, बिना किसी खाँचे के।

"ये तो नकली है," मीरा ने धीरे से कहा। "असली शीशी वाले ढक्कन पर मुंशीजी का नाम था। यहाँ कुछ नहीं।"

"तो उस बूढ़ी औरत ने उसे नकली शीशी क्यों दी?"

मीरा ने शीशी को उलटा किया। उसके पेंदे में काग़ज़ का एक छोटा टुकड़ा दबा था।

"देख," उसने कहा।

मैंने शीशी खोली। अंदर से काग़ज़ का टुकड़ा निकला। उस पर कोई लिखाई नहीं थी — सिर्फ़ एक छोटा-सा नीला धब्बा, जैसे स्याही की एक बूँद गिर गई हो।

"ये…" मैंने काग़ज़ सूँघा। मेरी नाक में एक गंध आई — बादाम का तेल, हल्का।

मेरे हाथ ठंडे हो गए।

"ये गंध मैंने पहले कहीं सूँघी है," मैंने कहा।

मीरा मेरी तरफ़ देखने लगी। "कहाँ?"

"उस काग़ज़ पर," मैंने कहा, "जो मेरी धोती की जेब में मिला था। जिस पर लिखा था — 'तेरी माँ झूठ बोल रही है'।"

तभी फाटक के अंदर से खड़खड़ाहट हुई। ताला खुला और टिंकू का चेहरा दिखा।

"आ जाओ, जल्दी," उसने फुसफुसाया। "वार्डन चाय बनाने रसोई में गई है। पाँच मिनट से ज़्यादा नहीं मिलेंगे।"

हम अंदर घुसे। स्कूल का आँगन सूनसान था — क्यारियाँ सूखी, झूले टूटे, दीवार पर बच्चों की पुरानी चित्रकारी। एक कोने में चारपाई पड़ी थी जिस पर कोई बच्चा सोया था।

टिंकू ने रास्ता दिखाया। "कमरा पीछे है। मैंने देखा — वार्डन ने चाबियों का गुच्छा लोहे के बक्से पर रखा था। एक चाबी बड़ी थी — उसी से ये खुलेगा।"

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