Billionaire Empire System – Chapter 793
"मैं भागूँगा नहीं।" रवि ने माला सीने पर कस ली। "पर इरा, तुम अंदर साथ नहीं चलोगी। तुम मोड़ पर रुको, कैमरा तैयार रखो। मैं और लुट्टन अंदर जाएँगे।"
इरा ने एक पल उसे देखा, फिर अपना बैग सँभाला। "ठीक है। पर अगर तुमने फ़ोन नहीं किया, तो मैं अंदर आ जाऊँगी। और मैं एकला नहीं आऊँगी — रघुवीर भी साथ होंगे।"
लुट्टन ने कमर पर हाथ रखा। "यार रवि, मैं एक बात कहूँ? हमारे पास बंदूक नहीं, लाठी नहीं, कुछ नहीं। सिर्फ़ एक लड़की का लैपटॉप और मेरी टाँगों का काँपना है।"
"के लिए चल रहे हैं?" रवि ने गली के मोड़ पर पैर रोका। "एक आदमी, जो दस साल से हमारी दुकान के बाहर सोया, ताकि कोई हमें नुकसान न पहुँचा सके। अब वो हमसे मदद माँग रहा है। हम खाली हाथ जाएँगे तो भी जाएँगे।"
लुट्टन ने थूक निगला, फिर अपनी जेब से पान का बीड़ा निकाला और मुँह में रखा। "चल," उसने कहा, "पर एक बात मान। अगर वहाँ कुछ भी गड़बड़ लगे, तो मैं तेरे से पहले दौड़ूँगा। मुझे बचाने के लिए तेरे पास वो चमकीली चीज़ है ना, जो तू कभी नहीं दिखाता?"
रवि ने पहली बार उस रात मुस्कुराने की कोशिश की। "हाँ, है। और एक बात और — वो चीज़ मुझे भी कभी-कभी डराती है।"
वो गली से बाहर निकले। पीछे शकुंतला दरवाज़े पर खड़ी रह गई, हाथ में गीला कपड़ा लिए, और उसके होंठ हिल रहे थे — कोई दुआ, या कोई बद्दुआ।
रास्ते में रवि ने क़ासिम भाई को फ़ोन मिलाया। पहली घंटी पर उठा। "बोल, बेटा।"
"अनवर साहब आपके पास पहुँचे?"
"पहुँच गए। बैठे हैं, चाय की तरफ़ देख रहे हैं, पर हाथ काँप रहे हैं।" फिर एक पल रुककर, आवाज़ धीमी, "कुछ और हुआ?"
"मुन्ना भाई को उठा लिया। उसने माला पर पता खरोंचा है। कारख़ाना। मैं जा रहा हूँ।"
क़ासिम भाई कुछ देर चुप रहे। फिर बोले, "बेटा, जब वहाँ से लौटे, तो सीधा मेरे पास आना। तेरे पिता की बही में एक पन्ना है, जो मैंने अब तक नहीं दिखाया। अब दिखाने का वक़्त आ गया है।"
फ़ोन कटा। रवि ने घड़ी को जेब से निकाला। वो फिर चलने लगी थी।
॥
"ये तीर किस चीज़ का है?" लुट्टन ने गर्दन आगे करके पूछा।
"पीपल के पेड़ की तरफ़।" रवि ने माला गले में डाल ली। "वहाँ से एक पुरानी सड़क जाती है, जो सीधे बंद कारख़ाने तक। दादी कम्मो बताती थीं — उस कारख़ाने में पहले लोहा पिघलता था, अब सिर्फ़ चूहे रहते हैं।"
इरा ने अपना बैग कंधे पर सँभाला। "चूहे या आदमी?"
रवि ने उसकी तरफ़ देखा। "दोनों।"
वो गली से बाहर निकले। इरा ने चलते-चलते कोमल को फ़ोन लगाया और दो मिनट में बात ख़त्म कर दी — "मशीन लेकर कारख़ाने के मोड़ पर मिलो। जल्दी। और अंदर मत आना।"
लुट्टन ने चलते-चलते अपना पान का बीड़ा निकाला, पर इस बार उसने मुँह में नहीं रखा। उसने बीड़ा मुट्ठी में दबाया और आसमान की तरफ़ देखा। "यार रवि, कभी-कभी मुझे लगता है, हम तीनों एक चाय की केतली में बंद होकर उबल रहे हैं।"
"उबलेंगे नहीं।" रवि ने अपनी घड़ी देखी। "पकाएँगे।"
रास्ते में रोहित का फ़ोन आया। पहली बार उसकी आवाज़ में वो ठंडी नपी-तुली लय नहीं थी, बल्कि कुछ हकलाया हुआ, कुछ जल्दी में। "रवि, जग्गू कारख़ाने पहुँचने को कह रहा है। उसने मुझे फ़ोन किया — मुझे, बारह साल में पहली बार। उसने कहा, 'रोहित बेटा, साहब ने मुझे खुद भेजा है।'"
"तेरे पापा ने भेजा है?" रवि ने पैर धीमे किए।
"हाँ। और रवि, मुझे लगता है… वो अब कुछ करने वाले हैं।" रोहित ने एक पल रुककर साँस ली। "मेरे पापा ने कभी जग्गू को अकेले नहीं भेजा, कभी नहीं। वो जग्गू को अपने साथ ही रखते हैं। इतना डरते हैं कि गाड़ी में भी साथ बैठाते हैं।"
रवि ने इरा की तरफ़ देखा, जिसकी आँखों में सवाल चमक रहा था। "तू कहाँ है?"
"रास्ते में। पच्चीस मिनट।" फिर रोहित की आवाज़ और धीमी हुई। "रवि, अगर आज कुछ हो जाए… तो मेरे पापा से कहना कि मैंने उनसे बार-बार पूछा था। वो कभी जवाब नहीं देते थे, पर मैंने पूछा था।"
फ़ोन कटा। लुट्टन ने एक लंबी साँस छोड़ी। "जग्गू… जो पूरी ज़िंदगी मुँह नहीं खोला… वो अब फ़ोन कर रहा है। यार, आज ये दुनिया सच में उलटी हो गई है।"
पुराना कारख़ाना शहर के बाहर एक ऊँची सूखी घास के पीछे छिपा खड़ा था — लोहे का विशाल ढाँचा, जिस पर जंग की परत लगी थी और छत के कई हिस्से से आसमान दिखता था। बाड़ का गेट लटका हुआ, आधा खुला। अंदर से किसी पुरानी मशीन की घरघराहट आ रही थी, जैसे कोई बहुत पुराना आदमी अपनी नींद में कराह रहा हो।
रवि ने इरा को मोड़ पर एक टूटी दीवार के पीछे खड़ा किया। "लेट जाओ यहाँ। कोमल आए, तो कैमरा चालू कर देना। मैं फ़ोन करूँगा।"
"और अगर नहीं किया?" इरा ने उसकी कलाई पकड़ी।
"तो खुद मत आना। रघुवीर को लेकर आना।"
इरा ने एक पल उसे देखा, फिर अपना हाथ खींच लिया। "जा। पर मैं सुन रही हूँ, ठीक है? मैं हमेशा सुन रही हूँ।"
रवि और लुट्टन बाड़ के नीचे से सरककर अंदर गए। फ़र्श पर कोयले की काली धूल थी, जो जूतों के नीचे पिसती हुई चरमराती थी। ऊपर से एक-दो टपकियाँ गिर रही थीं, जिनकी आवाज़ ऊँचे लोहे के पाइपों पर छन्… छन्… छन्… गूँजती थी।
और फिर रवि ने सुनी — किसी की रस्सी खींचने की आवाज़, और एक बूढ़ी, फटी आवाज़, जो काँपते हुए भी साफ़ बोल रही थी। "तू मेरी टाँग ले ले… दूसरी भी ले ले… पर उस बच्चे को बताने दे… उसके पापा को मारा गया था…"
लुट्टन ने रवि की बाँह पकड़ी। दोनों एक टूटी मशीन के पीछे रुके।
मुन्ना भाई एक लोहे की कुर्सी पर बँधे थे। उनकी एक टाँग रस्सी से सीधी खींच दी गई थी — वही अधूरी, जिस पर पहले से काम नहीं करता था। उनकी गर्दन झुकी हुई थी, मुँह से खून की लार टपक रही थी। और उनके सामने करीम खड़ा था — वही भारी शरीर, वही सफ़ेद कुर्ता, मोटी लाठी हाथ में। उसने लाठी का एक सिरा मुन्ना भाई के घुटने पर टिका दिया।
"बूढ़े," करीम ने ठंडी आवाज़ में कहा, "तेरी एक टाँग पहले से कमज़ोर है। दूसरी भी जाती रहेगी, तो तू क्या करेगा? भीख भी नहीं माँग पाएगा।"
मुन्ना भाई ने उसकी तरफ़ देखा, और उनकी आँखों में पानी था, पर आवाज़ साफ़ थी। "मैं भूखा मर जाऊँगा, करीम… पर वो बच्चा बैठा रहेगा और सोचता रहेगा कि उसका पापा दिल के दौरे से मरा… वो मुझे माफ़ नहीं करेगा… और मैं खुद भी नहीं करूँगा।"
करीम की लाठी उठने लगी। रस्सी चरमराई। रवि ने एक गहरी साँस ली — वो साँस जो वो हर बात से पहले लेता है — और मशीन के पीछे से बाहर आकर सीधा चला।
"तो मैं खुद सुन लूँ?"
करीम पलटा। उसका चेहरा एक पल के लिए हिल गया — जैसे किसी ने उसकी नींद के बीच पानी उँडेल दिया हो। फिर वो सँभला और उसकी उँगलियाँ लाठी पर कस गईं।
"चाय वाले…" उसने लाठी का सिरा मुन्ना भाई से हटाकर रवि की तरफ़ कर दिया। "तेरे पास जो काग़ज़ हैं, उन्हें जेब में रखने की आदत डाल ले। वरना आज तेरी भी हड्डी बजेगी।"
"मेरी हड्डी बजानी है, तो बजा।" रवि एक कदम और आगे आया, और उसकी आवाज़ धीमी थी — बहुत धीमी। "ये बूढ़ा मेरे पापा की आख़िरी रात देखने वाला गवाह है। इसकी टाँग पर लाठी रखने से तेरे साहब के काग़ज़ नहीं जलेंगे।"
करीम ने लाठी उठाई। हवा में एक आवाज़ हुई — छह्! — और फिर रुक गई, क्योंकि दरवाज़े पर खड़े जग्गू ने अपना तमंचा करीम की छाती की तरफ़ सीधा कर दिया था।
"करीम भाई, साहब ने कहा है — इसे छोड़ दो।"
वेबसाइट पर अपनी पसंदीदा कहानियाँ मुफ्त पढ़ें और Story FM App पर उन्हीं कहानियों का शानदार Audio Experience लें।
यह कहानी Story FM app पर ऑडियो में भी सुनें — आगे के एपिसोड सबसे पहले वहीं आते हैं।
Audio mein suno