The Mysterious Bell – Chapter 1186
मैंने टिंकू की तरफ़ मुड़कर देखा।
वो अब भी मेज़ का कोना पकड़े खड़ा था। उसकी कमीज़ पर पानी के दाग थे और उसके हाथ अब भी काँप रहे थे।
और मैंने उस वक़्त एक बात सोची, जो मैंने किसी को नहीं बताई — कल सुबह नौ बजे, स्कूल में जो अंधेरा आएगा, वो एक अंधेरा नहीं होगा। वो दरअसल एक दरवाज़ा खुलेगा — वो दरवाज़ा जो घंटी ने कहा था।
दोनों एक ही दरवाज़े पर खड़े हैं।
मैंने टिंकू को अंदर बुलाया, पीछे के कमरे से काजल को बुलाया और दुकान का शटर आधा गिरा दिया। फिर मैंने औज़ारों का ट्रंक खोला और उसमें से एक छोटी टॉर्च निकाली।
काजल ने देखा और पूछा, "अंकुश, क्या कर रहा है?"
मैंने कहा, "कुछ नहीं। बस तैयारी।"
"किस चीज़ की?"
"कल स्कूल में जो नहीं होना चाहिए, उसकी।"
पर मेरे भीतर एक आवाज़ थी जो कह रही थी — अंकुश, तू सिर्फ़ एक साइकिल मरम्मत करने वाला है। तेरे हाथ में घंटी है, एक ट्रंक है, एक टॉर्च है। स्कूल में तीन सौ बच्चे होंगे और रणवीर के पास बिजली का मेन स्विच होगा।
और वही वक़्त था जब टिंकू ने मेरी तरफ़ देखा और हाँफते हुए कहा, "उस्ताद, बबलू ने कहा कि कल स्कूल में जो होगा, उसका इल्ज़ाम तुम पर लगेगा।"
मैंने टॉर्च बंद की और उसे अपनी जेब में डाला।
फिर मैंने धीरे से कहा, "तो कल हम उस इल्ज़ाम के सामने खड़े होंगे। और देखेंगे कि उस काग़ज़ की स्याही पहले सूखती है या हमारा भरोसा।"
॥
रात आठ बजे के करीब मैं स्कूल के पीछे वाले कमरे में पहुँचा। स्कूल का गेट बंद था, पर रमा मैडम ने पीछे की खिड़की की कुंडी खुली रखी थी। चौकीदार रामलाल बाबा बाहर बरामदे में चारपाई पर बैठे थे और उनके हाथ में स्टील का गिलास था। मुझे देखकर उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस आँखों से इशारा किया कि अंदर चला जाऊँ।
कमरा वही पुराना था जिसमें बेंचें रखी थीं। दीवार पर एक टिमटिमाती बत्ती जल रही थी और कोने में लोहे की एक टूटी कुर्सी पड़ी थी। मीरा पहले से बैठी थी। उसके सामने खुली कॉपी थी और कैमरा मेज़ पर रखा था, पर बत्ती बंद थी। रमा मैडम बेंच के किनारे बैठी थीं और उनके हाथ में चाक का एक टुकड़ा था।
टिंकू सबसे पहले उठा। उसने मुझे देखा और बोला, "उस्ताद, मैंने सोच लिया है।"
मैंने कहा, "क्या सोच लिया?"
"कल मैं स्कूल आऊँगा।"
मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा। उसका कंधा अब भी थोड़ा काँप रहा था।
रमा मैडम ने चाक मेज़ पर रखा और बोलीं, "बैठो, अंकुश। पहले एक बात साफ़ कर लेते हैं।"
मैं बैठ गया।
"कल की परीक्षा रद्द नहीं होगी।"
मैंने कहा, "मैडम, अगर बिजली जानी है—"
"तो जाए।" उन्होंने मेरी बात काटी। "परीक्षा रद्द करना यानी यह मान लेना कि जो डर रात में गली में घूम रहा है, वो स्कूल के अंदर भी घूम सकता है। मैं यह नहीं मानती।"
मीरा ने कहा, "पर मैडम, बबलू ने साफ़ कहा है कि नौ बजे बिजली जाएगी। अगर अंधेरे में कुछ हुआ, तो इल्ज़ाम अंकुश पर आएगा।"
रमा मैडम ने मीरा की तरफ़ देखा। उनकी आँखों में वो चीज़ थी जो मैंने पहले कभी किसी मास्टर की आँखों में नहीं देखी थी — न गुस्सा, न डर, बस एक ठंडा हिसाब।
उन्होंने कहा, "मीरा, मैं पाँच साल से एक बात सीख रही हूँ। डर से बच्चों को नहीं बचाया जाता। सच से बचाया जाता है।"
फिर वो मेरी तरफ़ मुड़ीं।
"अंकुश, तुम बताओ। कल सुबह अंधेरा होगा, तो क्या करना है?"
मैंने जेब से टॉर्च निकाली और उसे मेज़ पर रख दिया।
"तीन चीज़ें करनी हैं, मैडम। पहली — मीटर का रास्ता। दूसरी — अंधेरे से पहले का सामान। तीसरी — यह कि अंधेरा कितनी देर रहेगा।"
टिंकू ने झट से कहा, "मीटर स्कूल की पिछली दीवार पर है। छत के नीचे। मैंने आज दिन में देखा था।"
मैंने उसकी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में वो तेज़ी लौट आई थी जो राँची जाने से पहले थी।
"कहाँ है ठीक से बता?"
टिंकू ने उँगली से हवा में आकार बनाया। "पीछे की दीवार से जब स्टोर की खिड़की आती है, उसके ऊपर। लोहे का बक्सा है। उसमें दो तार आते हैं — एक मोटा, एक पतला। और उसके नीचे एक हैंडल है जो घूमता है।"
मैंने कहा, "तूने हैंडल कैसे देखा?"
टिंकू का चेहरा थोड़ा बदला। "कल… कल शाम बबलू मुझे पकड़ने के बाद छोड़ने गया, तो मैं रास्ते में रुका। मुझे लगा कि अगर वो बिजली काटेंगे, तो कहीं से काटेंगे तो यहीं से।"
रमा मैडम ने उसकी तरफ़ देखा और धीरे से बोलीं, "तुम डर गए थे, फिर भी देखा।"
टिंकू ने नीचे देखा।
रमा ने कहा, "यही काम की बात है।"
मीरा ने कॉपी खोली। "मैंने आज शाम चार चीज़ें लिखी हैं। मीटर, स्टोर, स्टोर के अंदर का मेन स्विच और छत के दरवाज़े का ताला।"
मैंने पूछा, "छत के दरवाज़े का ताला?"
मीरा ने कहा, "आज दोपहर मैंने देखा। छत के दरवाज़े पर नया काला ताला लगा है। जिस पर तेल की गंध है। यानी अभी लगा है।"
मैंने कुछ देर सोचा। फिर मैंने कहा, "तो सीधा रास्ता बंद है।"
रमा मैडम ने पूछा, "कौन सा सीधा रास्ता?"
"छत से छत तक। अगर कोई ऊपर से आना चाहे, तो छत के दरवाज़े से आएगा। वो बंद है।"
टिंकू ने कहा, "पर उस्ताद, मीटर भी तो छत के नीचे है।"
मैंने कहा, "हाँ। और उस तक पहुँचने के लिए सीढ़ी चाहिए।"
मीरा ने कहा, "स्कूल में लोहे की सीढ़ी है। दीवार से टिकी है।"
मैंने कहा, "उसे कल सुबह से पहले हटाना होगा।"
रमा मैडम ने पूछा, "क्यों?"
"क्योंकि अगर वो मीटर तक पहुँचेंगे, तो तार नहीं काटेंगे। वो सीधे मीटर का हैंडल घुमा देंगे। और उसके लिए सिर्फ़ सीढ़ी चाहिए।"
कमरे में कुछ देर चुप्पी रही।
फिर रमा मैडम ने चाक उठाया और मेज़ पर एक लकीर खींची।
"अंकुश, कल सुबह सात बजे अभिभावक आएँगे। नौ बजे बच्चे। अगर हम सीढ़ी हटा देंगे, तो वो कोई और रास्ता ढूँढेंगे।"
मैंने कहा, "इसीलिए मुझे तीन चीज़ें चाहिए। लालटेन, मोमबत्तियाँ और एक आदमी जो अंधेरे में भीड़ को खड़ा रख सके।"
मीरा ने कहा, "लालटेन मैं जुटा सकती हूँ।"
रमा ने कहा, "भीड़ मैं खड़ी नहीं करूँगी। पर अगर अंधेरा हुआ, तो मैं बच्चों को वहीं बैठा रखूँगी, जहाँ वो पहले से बैठे होंगे।"
मैंने कहा, "ठीक है।"
रमा ने चाक से एक और लकीर खींची।
"अब दूसरी बात। अंकुश, कल जो इल्ज़ाम लगेगा, वो तुम पर होगा। तुम्हारे पास सबूत है?"
मैंने कहा, "मैडम, मेरे पास एक कटा हुआ तार है जो अभी तक कटा नहीं है। वो मैं कल कटने के बाद उठाऊँगा, उससे पहले नहीं।"
रमा ने कुछ देर मेरी तरफ़ देखा। फिर उन्होंने कहा, "इसका मतलब तुम कटने दोगे?"
मैंने कहा, "मैं रोकने की कोशिश करूँगा। पर अगर रुक गया, तो इल्ज़ाम किस पर आएगा?"
रमा ने कहा, "किसी पर नहीं।"
"और तब वो अगला रास्ता ढूँढेंगे। वो रास्ता जो हमें पता नहीं होगा।"
रमा मैडम ने चाक मेज़ पर रख दिया।
फिर वो बोलीं, "अंकुश, मैं मास्टर हूँ। मुझे यह तरीक़ा पसंद नहीं आ रहा। पर मैं यह भी जानती हूँ कि तुम जो कर रहे हो, वो तुम्हारी मर्ज़ी से नहीं कर रहे हो।"
मैंने कहा, "मैडम, मैं एक बात कहूँ?"
"कहो।"
"मैं भी हर चीज़ का सबूत नहीं जुटा रहा। कुछ चीज़ें मैं सिर्फ़ इसलिए रोक रहा हूँ कि उस रात कोई बच्चा डरकर घर न भागे। बस।"
रमा ने कुछ देर मुझे देखा। फिर उन्होंने धीरे से सिर हिलाया।
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