Spirit of a Fighter782 / 1295

Spirit of a Fighter – Chapter 782

7 min read November 5, 2026

"ये रही," उन्होंने कहा, और उसे पंचायत के मुखिया की तरफ़ बढ़ा दिया।

पर जब चाबी हाथ बदल रही थी, मेरी नाक में एक गंध आई।

मैंने ठाकुर की तरफ़ देखा। उनकी जेब से अभी भी कुछ झलक रहा था — पीतल का, छोटा, चमकता हुआ।

एक और चाबी।

मैंने कुछ नहीं कहा। पर मैंने मीरा की तरफ़ देखा, और आँखों से इशारा किया। उसने देखा। उसने सिर हिलाया।

वो समझ गई थी।

भीड़ धीरे-धीरे छँटने लगी। औरतें अपने बच्चों को समेटकर घरों की तरफ़ चलीं। पहलवान अपनी लाठियाँ उठाकर। पर कोई भी ठाकुर के पास से नहीं गुज़रा — सबने उनसे दूरी बनाई, जैसे वो अब छुआछूत हो गए हों।

मैं माँ के पास पहुँचा।

"तू ठीक है?" मैंने पूछा।

"मैं ठीक हूँ," उन्होंने कहा। और फिर उन्होंने मेरे हाथ में पीली शीशी देखी। "ये क्या है?"

"ठाकुर ने जग्गा को दी थी," मैंने कहा। "कहा कि ये दवा है।"

माँ ने शीशी को उँगलियों में उठाया, खोला, और सूँघा। उनका चेहरा नहीं बदला, पर उनकी आँखें सिकुड़ गईं।

"ये दवा नहीं है," उन्होंने कहा। "ये वही है जो रघुवीर बनाते थे। तहखाने की मिट्टी से।"

"तो ठाकुर ने जग्गा को क्यों दी?"

"क्योंकि वो जानता है," माँ ने कहा, "कि जग्गा इससे जीत जाएगा। और फिर वो कहेगा कि जीत उसकी दवा की है, जग्गा की मेहनत की नहीं। वो जग्गा को नहीं, अपनी दवा को जिताना चाहता है।"

मैंने शीशी माँ के हाथ से ले ली।

"तो इसे क्या करें?" मैंने पूछा।

"जो रघुवीर ने कहा था," माँ ने कहा। "ये ज़हर नहीं है। ये दवा है। पर दवा भी गलत हाथ में जाए, तो ज़हर बन जाती है।"

उन्होंने मेरी तरफ़ देखा।

"इसे मत फेंकना," उन्होंने कहा। "कल काम आएगी।"

रात को मैं सो नहीं पाया।

घर के आँगन में बैठा था, और आसमान में तारे गिन रहा था। माँ ने चूल्हा जलाया और खीर बनाई — टिंकू वाली खीर, जो उसने आज खुद बनाई थी, और उसमें शक्कर कम डाली थी।

"तेरा दोस्त अच्छी खीर बनाता है," माँ ने कहा। "मुझसे बेहतर।"

"उससे मत कहना," मैंने कहा। "वो सुनकर रोएगा।"

माँ हँसीं। बहुत दिनों बाद हँसीं।

"कल का डर है?" उन्होंने पूछा।

"नहीं," मैंने कहा। और फिर सच बोला। "हाँ।"

"डरना अच्छा है," उन्होंने कहा। "डर के बिना लड़ने वाला या तो पागल है या झूठा।"

वो मेरे पास बैठीं। उनकी कमर में दर्द था — मैंने देखा कि वो बैठते वक़्त हल्की सी कराहीं, पर मुँह पर कुछ नहीं कहा।

"माँ," मैंने कहा। "आज ठाकुर ने कहा कि वो तुझे तहखाने में बंद रखेगा।"

"मैंने सुना।"

"और मैं डर गया।"

माँ ने मेरी तरफ़ देखा। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा।

"डर गया, या डर दिखा दिया?" उन्होंने पूछा।

मैंने सोचा।

"दोनों," मैंने कहा।

"तो अच्छा किया," उन्होंने कहा। "अगर तू डरा नहीं होता, तो वो समझ जाता कि तेरे पास कोई कमज़ोरी नहीं है। और जिस आदमी के पास कमज़ोरी न दिखे, उससे सब डरते हैं। पर जो अपनी कमज़ोरी दिखा दे, उसे लोग अपना समझते हैं।"

"तो मैंने सही किया?"

"तूने वही किया जो एक इंसान करता है," उन्होंने कहा। "और कल भी वही करियो। इंसान बनियो, पहलवान बाद में।"

पर तभी आँगन के बाहर पैरों की आहट आई।

मैं उठ खड़ा हुआ। मेरे हाथ में कुछ नहीं था, पर मेरा शरीर तैयार था।

दरवाज़े पर मीरा खड़ी थी। उसके बाल बिखरे थे, और हाथ में एक काग़ज़ था।

"वीर," वो बोली, और उसकी आवाज़ में वो तेज़ी नहीं थी जो हमेशा होती थी। "मैंने ठाकुर के बंगले के तहखाने की चाबी से एक बक्सा खोला।"

"क्या मिला?"

"एक रजिस्टर," उसने कहा। "तीस साल पुराना। और उसमें हर उस औरत का नाम लिखा है जिसे ठाकुर ने बंद किया।"

मेरा दिल धक् से रह गया।

"कितनी?" मैंने पूछा।

मीरा ने काग़ज़ मेरे हाथ में दिया।

"ग्यारह," उसने कहा। "ग्यारह औरतें। और उनमें से सिर्फ़ दो ज़िंदा मिली हैं — जग्गा की माँ और एक और।"

मैंने रजिस्टर की तरफ़ देखा। नाम थे, तारीख़ें थीं, और हर नाम के आगे एक शब्द लिखा था।

"मर चुकी," मैंने पढ़ा। "मर चुकी। मर चुकी।"

और फिर मेरी नज़र आख़िरी नाम पर पड़ी।

वहाँ लिखा था — "सरस्वती। ज़िंदा। भाग गई।"

मैंने पलटकर माँ को देखा।

वो वहीं बैठी थीं, चूल्हे के पास, और उनके हाथ में खीर की कटोरी थी। उन्होंने मेरी तरफ़ देखा, और उनकी आँखों में कुछ ऐसा था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा।

"माँ," मैंने कहा, और मेरी आवाज़ काँप रही थी। "ये क्या है?"

माँ ने कटोरी रख दी।

"बैठ जा, बेटा," उन्होंने कहा। "अब तेरे सवाल का जवाब देने का वक़्त आ गया है।"

और तभी बाहर से सुक्खी बुआ की आवाज़ आई — दौड़ती हुई, हाँफती हुई।

"अरे! अरे सुनो सब!"

वो आँगन में घुसीं, और उनका पल्लू उनके पैरों में उलझ रहा था।

"ठाकुर के बंगले के पीछे वाला कमरा खुला मिला है," वो बोलीं, "और उसमें एक बूढ़ी औरत बैठी है — अकेली, अंधेरे में — और वो सिर्फ़ एक नाम दोहरा रही है।"

"कौन-सा नाम?" मीरा ने पूछा।

सुक्खी बुआ ने सबकी तरफ़ देखा, और उनकी आवाज़ धीमी हो गई।

"जग्गा," उन्होंने कहा। "वो बस 'जग्गा, जग्गा' कह रही है। और वो किसी को पहचान नहीं रही। वो कह रही है कि वो जग्गा की माँ है।"

मैंने माँ की तरफ़ देखा। उनका चेहरा सफ़ेद पड़ गया था।

"तो फिर वो औरत कौन है," मैंने धीरे से कहा, "जिसे मैंने आज जग्गा की गोद में दिया?"

माँ ने आँखें बंद कर लीं।

"बेटा," उन्होंने कहा, "आज तूने जग्गा को उसकी माँ नहीं दी। तूने उसे उसकी मौसी दी।"

और मेरे हाथ से कटोरी छूट गई।

॥

कटोरी ज़मीन पर गिरी, पर उसकी आवाज़ मुझे सुनाई नहीं दी। मेरे कानों में बस एक ही बात गूँज रही थी — मौसी।

मैंने माँ की तरफ़ देखा। वो अपनी उँगलियों को चूल्हे की राख में डालकर बैठी थीं, जैसे उन्हें उस राख में कोई जवाब मिल जाएगा।

"माँ," मैंने कहा। "तू जानती थी?"

"मुझे शक था," उन्होंने धीरे से कहा। "जब तूने बताया कि उस औरत ने जग्गा को गोद में लिया और रोई, तब मुझे लगा कुछ गड़बड़ है। माँ का रोना और मौसी का रोना — दोनों अलग होते हैं, बेटा। माँ का रोना अंदर से आता है, मौसी का रोना बाहर से।"

मीरा ने रजिस्टर मेज़ पर रखा और उसकी तरफ़ देखा।

"अगर वो जग्गा की मौसी है," उसने कहा, "तो असली माँ कहाँ है? और वो कमरे में क्यों बंद है? और वो 'जग्गा, जग्गा' क्यों दोहरा रही है?"

"वो इसलिए," माँ ने कहा, "क्योंकि तीस साल से उस औरत के सामने कोई नहीं आया। और जो औरत तीस साल अंधेरे में बैठी रहे, वो किसी की माँ नहीं, किसी की याद बन जाती है।"

सुक्खी बुआ हाँफती हुई आँगन में खड़ी थीं, और उनका पल्लू अब भी उनके पैरों से उलझ रहा था।

"अरे, सुनो तो," वो बोलीं। "वो औरत कुछ और भी बोल रही थी। मैंने ध्यान से सुना। वो कह रही थी — 'जग्गा, तेरी माँ ने मुझे बचाया था।'"

मेरे हाथ ठंडे पड़ गए।

"मतलब," टिंकू ने कहा, जो अब तक दरवाज़े पर खड़ा सब सुन रहा था, "जग्गा की माँ अभी भी कहीं ज़िंदा है?"

"या मरी हुई है," कालू काका ने कहा, जो अंधेरे में बैठे थे और अब तक चुप थे। "और जो मरा हुआ है, उसका सच कब्र में नहीं रहता। वो ज़मीन के ऊपर आ जाता है, किसी न किसी रूप में।"

मैंने मीरा की तरफ़ देखा। उसके होंठ काँप रहे थे।

"मुझे अंदर जाना है," मैंने कहा।

"मैं भी चलूँगी," मीरा ने कहा।

"नहीं।" मैंने उसका हाथ पकड़ा। "ये जग्गा का मामला है। पहले उसे जाने दो। वो तीस साल से इस औरत को माँ समझकर रो रहा है। अगर उसे पता चले कि वो उसकी माँ नहीं है, तो पहले उसे अकेले ही सहना होगा।"

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