Spirit of a Fighter436 / 1295

Spirit of a Fighter – Chapter 436

6 min read November 5, 2026

मैंने उनकी तरफ़ देखा। “तुम जानती थीं?”

“मैं औरत हूँ, बेटा,” उन्होंने कहा। “औरत को बताया नहीं जाता। वो बस देख लेती है। जिस दिन तेरे पापा मिट्टी में गए, उस दिन माधव सिंह ने मेरी तरफ़ देखा था। और उसकी आँखों में जो था, वो मैं आज तक भूली नहीं।”

मैंने अपना सिर झुका लिया।

“तो तुम मत जाओ,” मैंने कहा। “कल तुम घर में रहो। दरवाज़ा बंद। मैं देख लूँगा।”

“नहीं।” उनकी आवाज़ सपाट थी।

“माँ…”

“मैं जाऊँगी,” उन्होंने कहा। “अगर मैं नहीं गई, तो उन्हें शक होगा। और शक होने का मतलब है कि वो कोई और चाल चलेंगे। मैं जाऊँगी, बेटा। और तू उस कमरे के बाहर खड़ा होगा।”

“माँ, ये खतरा है।”

“खतरा?” उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुराईं। वो मुस्कान मैंने बहुत कम देखी थी। “तेरे पापा मिट्टी में गए थे, बेटा। उस दिन मैंने अपना सुहाग मिट्टी में मिलते देखा था। और मैं ज़िंदा रही। सिर्फ़ इसलिए कि मेरा एक बेटा था। अब वो बेटा पहलवान बनने वाला है। तो मैं एक कमरे से क्यों डरूँगी?”

मैं चुप हो गया। मेरी आँखों में पानी आ गया। मैंने अपना सिर उनके कंधे पर रख दिया। उनके कपड़े में चक्की की गंध थी, और हल्दी की।

“कल मेरे साथ चलना,” उन्होंने कहा। “तू मेरे साथ आएगा, ठीक वैसे ही जैसे मैं हमेशा तेरे साथ चली हूँ।”

“माँ, मीरा को भी बुला रहे हैं।”

माँ कुछ देर चुप रहीं। फिर उन्होंने मेरा सिर सहलाया।

“तो उससे पहले उस लड़की से मिल,” उन्होंने कहा। “और उसे बता दे। जो औरत खतरे में पड़ने वाली हो, उसे पहले पता होना चाहिए। चुप्पी में नहीं रहना चाहिए।”

मैंने अपना सिर हिलाया। मैं उठा। “मैं अभी जाता हूँ।”

“इतनी रात?”

“वो जाग रही होगी। उनके पापा की दवा… वो रात में दो बार देती है।”

माँ ने मेरी तरफ़ देखा। कुछ देर। फिर उन्होंने अपनी साड़ी का कोना ठीक किया।

“जा,” उन्होंने कहा। “और सुन — उस लड़की को कहना, कल वो अकेली नहीं होगी।”

मैं दौड़ा। रात में गाँव सो रहा था। कुत्ते भौंक रहे थे। मेरी चप्पल की आवाज़ मिट्टी में दब रही थी। रास्ते में नीम का पेड़ आया। उसके नीचे से गुज़रते वक़्त मुझे कुछ महसूस हुआ — जैसे कोई मेरे पीछे खड़ा हो। मैं पलटा। कोई नहीं था।

पर हवा में गंध थी। वो गंध। कड़वी, मीठी, जैसे गुड़ जला हो।

मैं रुका। मैंने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली। गंध नीम के पेड़ से आ रही थी। पेड़ के तने पर। मैंने अपना हाथ तने पर रखा। मेरी उँगलियों को कुछ लगा। गीला। मैंने हाथ सूँघा।

वो पानी था। वही पानी। भैरव का पानी।

मैंने अपनी आँखें खोलीं और पेड़ के तने को देखा। उस पर एक निशान बना था। कोयले से। एक त्रिकोण, और उसके बीच एक बिंदु।

वही निशान। हरनाम की चाबी पर। तहखाने के संदूक पर। श्यामू काका की चाबी पर।

मेरा दिल तेज़ हो गया। ये निशान मेरे घर से मीरा के घर तक के रास्ते पर था। मतलब कोई जानता था कि मैं इस रास्ते से जाता हूँ। कोई मेरा पीछा कर रहा था। और वो कल से पहले मुझे डराना चाहता था।

मैंने अपने हाथ को अपनी धोती पर पोंछा और आगे बढ़ा। मेरे कदम अब तेज़ थे। मेरे अंदर डर नहीं था। गुस्सा था।

मीरा का घर आया। खिड़की में रोशनी थी। मैंने दरवाज़ा खटखटाया। एक पल बाद दरवाज़ा खुला और मीरा सामने खड़ी थी। उसके हाथ में दवा की शीशी थी। उसके बाल बिखरे थे। उसकी आँखों में थकान थी।

“वीर?” उसने कहा। “इतनी रात? क्या हुआ?”

“मीरा,” मैंने कहा। मेरी आवाज़ सूखी थी। “अंदर चलो। तुम्हारे पापा जाग रहे हैं?”

“हाँ, पर…”

“अंदर चलो। सबको बताना है।”

अंदर रणवीर सिंह पलंग पर बैठे थे। उनकी आँखें मेरी तरफ़ उठीं। उन्होंने मेरा चेहरा देखा और उनके हाथों ने चादर पकड़ ली।

“बोल,” उन्होंने कहा। “क्या हुआ?”

मैंने सब बताया। कुएँ की सीढ़ियाँ। अंधेरा कोना। भैरव की आवाज़। और माधव सिंह की आवाज़। जब मैंने “मैंने शेर सिंह को खत्म किया” वाला वाक्य बोला, तो रणवीर सिंह का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं। उनके होंठ काँपे।

“बीस साल,” उन्होंने धीरे से कहा। “बीस साल मैंने सोचा कि शेर सिंह की मौत कुदरत का सितम थी। और वो…”

“वो माधव सिंह था,” मैंने कहा। “और रघुवीर भी। और तुम्हारे पैर भी। सब उसी का काम है।”

रणवीर सिंह ने अपनी आँखें खोलीं। उनकी आँखों में आँसू नहीं थे। उसमें कुछ और था। वो आग जो बीस साल से दबी थी, अब बाहर आ रही थी।

“मैं जानता था,” उन्होंने कहा। “मैं हमेशा जानता था। पर मेरे पास सबूत नहीं था। और मैं अपनी बेटी को खतरे में नहीं डालना चाहता था।”

“अब सबूत है,” मैंने कहा। “मैंने सुना है। मेरे कान सबूत हैं। और मेरी नाक।”

“कान?” मीरा ने कहा। वो मेरे पास आई। उसकी आँखें चौड़ी थीं।

“मैंने सुना,” मैंने कहा। “मैं उस कोने में खड़ा था और मैंने सब सुना। हर शब्द।”

मीरा ने मेरी तरफ़ देखा। उसके हाथ में दवा की शीशी थी, और वो काँप रही थी। फिर उसने वो शीशी मेज़ पर रख दी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई।

“तो अब क्या?” उसने पूछा।

“कल वो तुम्हें बुलाएँगे,” मैंने कहा। “तुम्हें और मेरी माँ को। किसी बहाने से। मंदिर के पास वाले कमरे में।”

मीरा की आँखों में डर आया। एक पल के लिए। फिर वो गायब हो गया। उसने अपनी ठुड्डी ऊपर की।

“तो चलो,” उसने कहा। “हम भी वही करेंगे जो वो करना चाहते हैं। उल्टा।”

“कैसे?”

“वो हमें कमरे में बंद करना चाहते हैं। तो हम पहले से कमरे में रहेंगे। मैं अपने पापा को लेकर आऊँगी। तुम अपनी माँ को। और जब वो कमरा खोलेंगे, तो उन्हें वहाँ मिलेंगे — हम सब। बंद नहीं, खुले हुए।”

मैंने उसकी तरफ़ देखा। मेरे अंदर कुछ हिला।

“पर वो हमें खत्म कर सकते हैं,” मैंने कहा।

“नहीं करेंगे,” मीरा ने कहा। “क्योंकि उन्हें पता नहीं होगा कि हम जानते हैं। वो सोचेंगे हम अंदर हैं, डर से काँप रहे हैं। और जब वो दरवाज़ा खोलेंगे, तो उनके सामने होगा — सबूत। कालू काका। हरनाम की चाबी। वो काग़ज़। और मेरे पापा।”

रणवीर सिंह ने अपना सिर उठाया। उन्होंने मीरा की तरफ़ देखा और उनके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई।

“तू मेरी बेटी है,” उन्होंने कहा। “बेटा, बेटी नहीं।”

मीरा ने अपने पापा की तरफ़ देखा और उसकी आँखें भर आईं। उसने अपना हाथ पकड़कर उनके हाथ पर रख दिया।

“तो पक्का हुआ?” मैंने पूछा।

“पक्का,” मीरा ने कहा।

“पर कल मुकाबला भी है,” मैंने कहा। “भैरव से।”

“तो क्या हुआ?” रणवीर सिंह ने कहा। “तू मुकाबला लड़ेगा। और हम अंदर वाला काम करेंगे।”

मैंने उनकी तरफ़ देखा। मेरे अंदर का डर अब भी था। पर उसके साथ कुछ और भी था। कुछ जो माँ ने कहा था — डर के साथ लड़।

“ठीक है,” मैंने कहा। “कल सुबह।”

मैं बाहर निकला। रात खत्म हो रही थी। आसमान थोड़ा हल्का हो रहा था। और मैंने नीम के पेड़ की तरफ़ देखा — जहाँ उसने निशान छोड़ा था। मैंने सोचा, अगर वो मुझे डराना चाहता है, तो मैं उसे बताऊँगा कि मैं डरता नहीं।

मैं घर पहुँचा। माँ दरवाज़े पर खड़ी थीं। उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और कुछ नहीं पूछा। बस अंदर आने का इशारा किया।

मैं अंदर गया। गुड़िया सो रही थी। उसकी कॉपी उसके सिरहाने थी। मैंने उसे देखा और मेरा दिल भर आया।

मैं माँ के पास बैठ गया।

“माँ,” मैंने कहा। “कल तुम कमरे में अकेली नहीं होगी।”

उन्होंने मेरी तरफ़ देखा। “मतलब?”

वेबसाइट पर अपनी पसंदीदा कहानियाँ मुफ्त पढ़ें और Story FM App पर उन्हीं कहानियों का शानदार Audio Experience लें।

यह कहानी Story FM app पर ऑडियो में भी सुनें — आगे के एपिसोड सबसे पहले वहीं आते हैं।

Audio mein suno

Apni raay likho