A Dark Secret154 / 536

A Dark Secret – Chapter 154

7 min read November 6, 2026

"अर्जुन, अमरीक साहब की बातों में यकीन मत करना। उनकी ज़ुबान एक आवाज़ करती है, और उनकी जेब दूसरी।"

वो मुड़ा और चला गया।

मैं चारपाई पर बैठा रहा।

नैना के हाथ में काग़ज़ था और वो उसे देख रही थी, पर उसकी आँखें भी भोला के पीछे थीं।

"अमरीक सिंह," उसने धीरे कहा। "वो ड्राइवर यूनियन का अध्यक्ष है।"

"मुझे भी लगा।"

"और भोला ने ग्यारह सेकंड में उसका सबसे बड़ा राज़ बता दिया।"

"ग्यारह सेकंड?"

"मैंने गिना," नैना ने कहा। "आदत है।"

मैं हँसा।

और जुगनू, जो अब तक रोटी खत्म कर चुका था, मेरे कान के पास आकर बोला —

"अर्जुन भैया, जब तुम भोला भैया से बात करने गए थे, तो एक सफ़ेद शर्ट वाला आदमी ढाबे की तरफ़ आया था। रुक्मा दीदी ने उसे चमच से ही रोक दिया।"

मैं सीधा हो गया।

"कहाँ?"

जुगनू ने ढाबे के नुक्कड़ की तरफ़ इशारा किया।

"दूर से देखकर लौट गया। पर मैंने उसकी चप्पल उठा ली।"

उसने अपनी जेब से एक चप्पल निकाली।

सफ़ेद। एक चप्पल। सस्ती।

मेरी नज़र चप्पल पर गई और फिर नैना पर।

नैना ने चप्पल नहीं देखी।

नैना ने मेरी तरफ़ देखा और उसकी आँखों में वो सवाल था जो मैं कभी नहीं पूछता।

"अर्जुन," उसने कहा। "ये शहर तेरे दुश्मनों से ज़्यादा तेरे पीछे है।"

"मुझे पता है।"

"हर जगह।"

"मुझे पता है।"

"और तेरी जेब में दो हज़ार का काग़ज़ है और तेरी बनियान में मौत का हिसाब।"

मैंने उसकी तरफ़ देखा।

"हाँ," मैंने कहा। "और मेरी उँगली पर चाचा की चाय का जला हुआ निशान है।"

नैना ने मेरी ऊँगली देखी। निशान देखा। फिर उसने अपना फटा बैग उठाया और कंधे पर डाला।

"चल," उसने कहा।

"कहाँ?"

"यूनियन की मीटिंग में।"

"वो कल है।"

"हाँ।" उसने चश्मा ऊपर धकेला। "इसलिए आज हम वहाँ जा रहे हैं। खाली जगह देखने, आसपास के रास्ते देखने, और ये देखने कि अमरीक सिंह के मंच के चारों तरफ़ कौन बैठता है।"

मैं उसके पीछे चल पड़ा।

और जब हम निकल रहे थे तो रुक्मा दीदी ने हमें रोका।

"एक बात।"

हम रुके।

"कल यूनियन की मीटिंग में बहुत भीड़ होगी। ड्राइवर, मालिक, मुनीम, पुलिस — सब। कोई किसी का नहीं होता वहाँ।" उसने मेरी तरफ़ देखा। "अगर बात बिगड़े, तो मंच पर नहीं, बाहर भाग। मंच पर भागने वाले को सब देखते हैं। बाहर भागने वाला अगले दिन वापस आ सकता है।"

"समझ गया।"

"और चाय का हिसाब कॉपी में चढ़ा है।"

"कितना?"

"अठारह रुपये।"

"इतना कम?"

"तेरे से ज़्यादा नहीं लूँगी।" उसने मुस्कुराकर कहा। "तू अभी ग़रीब है। ग़रीब से ज़्यादा लूँ तो तेरा पूरा दिन खराब हो जाएगा।"

मैं हँसा।

और ढाबे से निकलकर सड़क पर आया तो मैंने पहली बार महसूस किया कि आज की सुबह कुछ और है। आसमान बादलों से भरा था, पर बारिश नहीं हो रही थी। हवा में धूल थी और धूल में ठंडक थी।

जैसे कोई बड़ी चीज़ आने वाली हो।

नैना ने अपनी छोटी पुरानी गाड़ी स्टार्ट की। वो आवाज़ पहले जैसी ही थी — एक पहिया अलग बोल रहा था और ऊपर फ़्रेम से हल्की टन-टन आ रही थी।

"तेरी गाड़ी का पहिया," मैंने कहा, "बारह दिन से हवा कम है।"

"तूने बारह दिन कैसे गिने?"

"बारह दिन से आवाज़ वही है।"

नैना ने मेरी तरफ़ देखा और उसके चेहरे पर वो भाव आया जो पहली बार मिलने पर था — कुछ हिसाब, कुछ शक, और कुछ ऐसा जो मुझे ठीक से समझ नहीं आया।

"तुझे सच में सब सुनाई देता है?"

"सब नहीं।" मैंने खिड़की से बाहर देखा। "बस जो बाकी लोगों को शोर लगता है।"

वो मुस्कुराई। छोटी सी।

और गाड़ी चल पड़ी।

और मैं पीछे बैठकर सोचता रहा — चाचा कहाँ हैं? क्यों मुझे रोका? क्यों कहा कि ये मौत का हिसाब है?

और फिर मैंने अपनी जेब में पड़ी पर्ची को हाथ से दबाया, और मेरे अंदर एक बात साफ़ हो गई।

ये पर्ची चाचा की जेब में नहीं थी।

ये पर्ची चाचा के कोट से गिरी थी।

और चाचा ने उसे देखते ही कहा था — "निकाल, अर्जुन।"

निकाल।

न मत छू।

न मत पढ़।

निकाल।

एक आदमी चीज़ छिपाने को कहता है तो "कुछ मत पूछ"। पर एक आदमी जब ये कहता है कि "निकाल", तो उसका मतलब होता है कि उस चीज़ ने उसके सामने पहले भी ऐसा कुछ किया है जो उसने झेला है।

चाचा ने झेला है।

और अब मुझे जानना था कि उसने क्या झेला है।

गाड़ी मुड़ी और पुराने पुल की तरफ़ जाने वाला रास्ता आया।

और मैंने देखा — कि रास्ते के किनारे, जहाँ सुबह के सात बजे सिर्फ़ कुत्ते और ट्रक होते हैं, वहाँ एक सफ़ेद गाड़ी खड़ी थी।

इंजन बंद।

कोई अंदर नहीं।

पर हूड गरम था — मुझे दूर से भी उसकी टपकती गर्मी की आवाज़ आ रही थी, चट-चट, ठंडा होता धातु।

मैंने नैना को कोहनी से छुआ।

"रुक।"

नैना ने ब्रेक दबाया।

"क्या?"

मैंने सफ़ेद गाड़ी की तरफ़ देखा।

"वो गाड़ी अभी रुकी है," मैंने कहा। "दो मिनट से ज़्यादा नहीं।"

नैना ने देखा।

"कैसे पता?"

"इंजन की बॉडी ठंडी होते वक़्त बोलती है। ज़्यादा देर हुई होती तो आवाज़ खत्म हो जाती। अभी बोल रही है।"

नैना ने कुछ नहीं कहा। उसने सिर्फ़ अपना कैमरा उठाया।

और मैंने अपना दरवाज़ा खोला।

"कहाँ जा रहा है?"

"देखने।"

"अर्जुन —"

"तू यहीं रुक।" मैंने उसकी तरफ़ देखा। "अगर मैं दो मिनट में न लौटूँ तो गाड़ी आगे ले जाना, मुड़कर मत आना।"

उसने होंठ दबाए। फिर सिर हिलाया।

मैं सफ़ेद गाड़ी की तरफ़ चला।

हवा में धूल थी और मेरी चप्पल की आवाज़ सड़क पर साफ़ सुनाई दे रही थी।

मैं पास पहुँचा।

गाड़ी खाली थी।

और आगे की सीट पर, बाएँ कोने में, कुछ रखा था।

एक लिफ़ाफ़ा।

पीला।

और उसके कोने पर — वही हल्का नीला गोल निशान।

मैंने गाड़ी के शीशे पर झुककर देखा।

लिफ़ाफ़े पर कोई नाम नहीं। कोई शब्द नहीं।

बस निशान।

और मेरे कानों में भोला की आवाज़ गूँजने लगी —"उनकी ज़ुबान एक आवाज़ करती है, और उनकी जेब दूसरी।"

मैंने गाड़ी का दरवाज़ा खींचा।

खुला था।

मैंने लिफ़ाफ़ा उठाया।

वो भारी नहीं था। हल्का था। और उस पर इलायची की महक थी, और चाय की गंध, और नई स्याही की बदबू — वो बदबू जो काग़ज़ पर ताज़ा टाइप हुए अक्षर छोड़ते हैं।

मैंने उसे उलटा किया।

पीछे कुछ टाइप हुआ था।

तीन शब्द।

और तीन शब्द पढ़ने के बाद मेरे हाथ की उँगलियाँ ठंडी हो गईं, और मुझे लगा कि सुबह की हवा अचानक तेज़ हो गई है, और सड़क पर कोई मेरी तरफ़ देख रहा है।

तीन शब्द थे —

जो चाचा के घर से लिया, वो लौटा दे।

मैं सफ़ेद गाड़ी के पास खड़ा रहा।

और मेरे अंदर एक सवाल उठा जो मुझे रात से परेशान कर रहा था, और आज सुबह उसने मेरा कंधा पकड़ लिया।

अगर चाचा सच में उस रात कुछ नहीं जानते, तो ये लिफ़ाफ़ा उनके घर के सामने से आने वाली गाड़ी में क्यों रखा है?

मैंने लिफ़ाफ़ा जेब में डाला।

और मैं पलटा।

और मैंने देखा कि सड़क के उस पार, दूर, पीपल के पेड़ के नीचे, एक आदमी खड़ा था।

सफ़ेद कुर्ता।

हाथ जेब में।

और वो मेरी तरफ़ देख रहा था।

मैंने एक कदम आगे बढ़ाया।

वो हिला नहीं।

मैंने दूसरा कदम बढ़ाया।

वो पलटा।

और धीरे-धीरे चलने लगा।

भागा नहीं।

बस चला।

जैसे उसे पता हो कि मैं उसका पीछा नहीं करूँगा।

और वो सही था।

क्योंकि मैंने अपनी गाड़ी की तरफ़ देखा, और नैना मुझे देख रही थी, और उसका कैमरा हाथ में था, और उसकी गाड़ी सड़क के बीच में खड़ी थी — और मेरे पास दौड़ने का वक़्त नहीं था।

मैं गाड़ी की तरफ़ लौटा।

दरवाज़ा खोला और बैठ गया।

नैना ने मेरी तरफ़ देखा।

"क्या मिला?"

मैंने लिफ़ाफ़ा निकाला और उसकी गोद में रख दिया।

उसने उसे उलटा किया।

तीन शब्द पढ़े।

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